हिंदी को कार्यालयीन कार्य-संस्कृति का स्वाभाविक हिस्सा बनाने पर जोर

संचिता सुषमा वाल्के


भोपाल। सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया, आंचलिक कार्यालय भोपाल के संयोजन में गठित नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), भोपाल की 84वीं अर्द्धवार्षिक बैठक का आयोजन सयाजी होटल, भोपाल में गरिमापूर्ण वातावरण में किया गया। बैठक की अध्यक्षता नराकास भोपाल के अध्यक्ष एवं सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अंचल प्रमुख श्री धीरज गोयल ने की। बैठक में भोपाल स्थित विभिन्न बैंकों, बीमा एवं वित्तीय संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों तथा राजभाषा अधिकारियों ने सहभागिता की।
बैठक का प्रमुख उद्देश्य सदस्य कार्यालयों में भारत सरकार की राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा तथा हिंदी के प्रगतिशील प्रयोग को और अधिक बढ़ावा देना रहा।
अध्यक्षीय संबोधन में श्री धीरज गोयल ने कहा कि राजभाषा हिंदी का प्रयोग केवल निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति तक सीमित न रहकर कार्यालयीन कार्य-संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनना चाहिए। हिंदी में कार्य करने से प्रशासनिक कार्यों में सहजता, स्पष्टता एवं प्रभावशीलता आती है। उन्होंने हिंदी टूल, अनुवाद, तकनीकी सुविधाओं एवं प्रशिक्षण पर बल देते हुए सदस्य कार्यालयों से हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग तथा श्रेष्ठ कार्य-पद्धतियों को आपस में साझा करने का आह्वान किया।

नाबार्ड की मुख्य महाप्रबंधक सी. सरस्वती ने सरल, सहज एवं प्रभावी हिंदी के प्रयोग पर जोर देते हुए कहा कि वित्तीय संस्थानों का सीधा संबंध आमजन से है। ऐसे में योजनाओं एवं सेवाओं की जानकारी जनसामान्य तक पहुंचाने में सरल हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका है।भारतीय रिजर्व बैंक की क्षेत्रीय निदेशक सुश्री सुजाता लाल ने कहा कि डिजिटल युग में राजभाषा हिंदी के प्रयोग की संभावनाएं पहले की अपेक्षा कहीं अधिक व्यापक हैं। उन्होंने बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र की वेबसाइटों, ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल माध्यमों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने पर बल दिया।

भारतीय जीवन बीमा निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक धर्मपाल ने कार्यालयों में हिंदी के प्रति सकारात्मक एवं प्रेरणादायी वातावरण बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि हिंदी को हृदय से आत्मसात करने तथा हिंदी में कार्य करने में किसी प्रकार की झिझक नहीं होनी चाहिए।
राजभाषा विभाग के उपनिदेशक श्री नरेंद्र सिंह मेहरा ने कहा कि नराकास की बैठकें केवल राजभाषा कार्यान्वयन की समीक्षा का मंच नहीं, बल्कि विभिन्न कार्यालयों के बीच अनुभवों एवं श्रेष्ठ कार्य-पद्धतियों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। उन्होंने राजभाषा कार्यान्वयन में मात्रात्मक उपलब्धियों के साथ गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने तथा अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मूल रूप से हिंदी में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक में सदस्य कार्यालयों में राजभाषा कार्यान्वयन की प्रगति एवं अनुपालन की समीक्षा की गई। सभी सदस्य कार्यालयों से आपसी समन्वय के साथ हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने तथा राजभाषा नीति के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने का आह्वान किया गया।

हिंदी प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को पुरस्कार
बैठक के दौरान गत वर्ष आयोजित हिंदी प्रतियोगिताओं तथा हिंदी में उत्कृष्ट कार्य निष्पादन करने वाले सदस्य कार्यालयों एवं प्रतिभागियों को समिति की ओर से विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।

बैठक के समापन पर अतिथियों, कार्यालयाध्यक्षों एवं राजभाषा अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। उपस्थित सदस्यों ने हिंदी के प्रगतिशील प्रयोग को बढ़ाने तथा हिंदी को कार्यालयीन कार्य-संस्कृति का स्वाभाविक हिस्सा बनाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।